Tuesday, November 6, 2012

                  मुक्तक

इतना चाहो न मुझको   मैं   डर  जाऊँगा ।
दिल का शीशा जो टूटा बिखर जाऊँगा ।
गर  निगाहों से   मुझको   गिराया   कभी ,
जाऊँगा,  पर    न  जाने    कहाँ    जाऊँगा ।

8 comments:

  1. वाह झंझट जी ....क्या झंझट है ..कहाँ जाऊँगा ...सोचनीय

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  2. दिल का शीशा जो टुटा तो बिखर जाऊंगा ............प्रशंशनीय प्रस्तुति.........
    स:परिवार दीपावली की ढेरों बधाइयाँ एवं शुभकामनाएं.......

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  3. बहुत खुब.

    दिपावली की शुभकामनाएं.

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  4. bahut khoooooob!!!!

    http://meourmeriaavaaragee.blogspot.in/2012/11/blog-post_8.html#comment-form

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  5. Great Blog my friend, congratulations and many greetings from:
    http://heroes-de-accion.blogspot.com/

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  6. वा वाह ...
    क्या बात है भाई !
    आभार !

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