Tuesday, August 30, 2011

अलिखित

मुझे लिखना है 
हाँ , बहुत कुछ लिखना है
किन्तु 
कहाँ से शुरू करूँ ?
क्या लिखूँ प्रारंभ में ?

एक पंक्ति में
लटकते हुए 
अनगिनत
रंगीन बल्बों की तरह 
कई-कई बातें ....
शिकायतें , आक्रोश , क्षोभ-
ग्लानि , दुःख , पश्चाताप...
और 
इन्हीं के बीच 
दिपदिपाते जुगनू 
क्षणिक खुशियों के !

किस को कहाँ स्थान दूँ ?
कहाँ-कहाँ टाँक दूँ ?
किस-किस को ...

बस 
इसी कशमकश में 
जूझने लगता हूँ ..
जब भी उठाता हूँ-
कलम और कागज़  
और
हर बार रह जाता है 
अलिखित 
बहुत कुछ......


46 comments:

  1. वाह कशमकश को सुन्दर अभिव्यक्ति दी है...ये दुविधा हम सब की है...

    नीरज

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  2. सबकी हालत ऐसी ही लगाती है ! समझौता गमो से कर लो - खुशिया अपने आप आ जाएगी !

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  3. बस
    इसी कशमकश में
    जूझने लगता हूँ ..
    जब भी उठाता हूँ-
    कलम और कागज़
    और
    हर बार रह जाता है
    अलिखित
    बहुत कुछ......हम चाहे कितना ही प्रयास कर ले फिर भी वो नही लिख पाते जो लिखना चाहते है...

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  4. बस यही कशमकश होती है जो लिखना होता है वही अलिखित रह जाता है...

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  5. मन की कशमकश को बखूबी उकेरा है।

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  6. सभी लेखकों के मन की अभिव्यक्ति।

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  7. यही कशमकश तो जीवंत रखती है.सुंदर अभिव्यक्ति.

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  8. कलम और कागज़
    और
    हर बार रह जाता है
    अलिखित
    बहुत कुछ......
    हर मन की पीड़ा लिख दी सुरेन्द्र भाई...
    सादर आभार...

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  9. एक रचनाकार की यही तो खासियत होती है की वो हमेशा अपने दिल की करता है.

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  10. कविमन की निश्छलता का बहुत ही सुंदर शब्दांकन| बधाई मित्र|

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  11. अलिखित ही रहे... ताकि हर बार कुछ लिखा जाए ...

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  12. सुरेन्द्र जी, आखिर आपने कह दिया ...
    हम प्रायः उन ही बातों को सामने ला पाते हैं जो तुकांत होती हैं. वैचारिक रूप से प्रोढ़ होती हैं अथवा मासूम या निर्दोष होती हैं. ऐसे में हम न जाने कितने ही भावों को उकेर नहीं पाते...अलिखित रहा जाता बहुत कुछ... रह जाते हैं कलम द्वारा उधेड़े जाने से कितने ही भाव.

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  13. bahut hi sunder sanjog aur kavi ki kavitha

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  14. बहुत सुन्दर प्रस्तुति ... आज एक प्रसंग पढ़ रही थी .. अभी यह तो याद नहीं किसका ब्लॉग था ... शीर्षक था ... अधूरा गीत ...

    गुरुदेव के अंतिम समय में किसी ने कहा कि आपने ६००० गीत लिखे हैं ..इतना साहित्य तो किसी ने नहीं लिखा होगा ..उनका जवाब था कि जो लिखना चाहता था वो गीत अधूरा ही रह गया ..उसको पूरा करने में ही ये सब गीत लिखे गए ...लेकिन जो लिखना चाहता था वो गीत आज भी अधूरा ही है ..

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  15. हां, शायद हर कवि के पास ऐसी ही बहुत सारी अलिखित सामग्री संचित रहती है।

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  16. जैसे ही आसमान पे देखा हिलाले-ईद.
    दुनिया ख़ुशी से झूम उठी है,मनाले ईद.
    ईद मुबारक

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  17. विचारों की गहन अभिव्यक्ति

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  18. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी है
    तेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
    अवगत कराइयेगा ।

    http://tetalaa.blogspot.com/

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  19. किस को कहाँ स्थान दूँ ?
    कहाँ-कहाँ टाँक दूँ ?
    किस-किस को ...

    बहुत सुंदर कविता और भावाभिव्यक्ति.

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  20. बहुत सुंदर भावाभिव्यक्ति.

    ईद की हार्दिक शुभकामनाएं.

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  21. सुन्दर प्रस्तुति...ईद मुबारक़

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  22. बस इसी तरह लिखते रहें ! सुंदर रचना ...शुभकामनाएँ ।

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  23. मन की सुन्दर अभिव्यक्ति ........ईद की मुबारकबाद ....

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  25. झंझट जी,
    रामराम!
    हज़ार मील की यात्रा, पहले कदम से शुरू होती है! शुरू हो जाइए....
    आशीष

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  26. सचमुच यही सबसे बड़ी समस्या है। बहुत सुंदर।

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  27. बहुत ही सुंदर कविता भाई सुरेन्द्र जी बधाई और शुभकामनाएं

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  28. हर बार रह जाता है
    अलिखित
    बहुत कुछ......

    सुरेन्द्र जी

    अलिखित के बहाने बहुत कुछ लिख दिया है आपने … बधाई !

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  29. कवी मन की निश्छल अभिव्यक्ति |
    आशा

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  30. गहरे भाव और अभिव्यक्ति के साथ शानदार रचना ! उम्दा प्रस्तुती !
    आपको एवं आपके परिवार को गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनायें!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
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  31. अलिखित ...सुन्दर लिखा है और सबकुछ भी..

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  32. मन की कशमकश को बखूबी उकेरा.....सुरेन्द्र जी

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  33. इन शब्दों के द्वन्द से बाहर आना होगा कवि को ... तभी तो रचना का आविष्कार होगा ...

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  34. कहीं से भी लिखना शुरू कीजिये, पढने वाले अलिखित भी पढ़ लेते हैं...

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  35. इस अलिखित की पीड़ा कैसी होती है, सहज ही समझा जा सकता है...

    अंतर्व्यथा को प्रभावपूर्ण अभिव्यक्ति दी आपने...

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  36. सही लिखा है सर! रचना पसंद आई!

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  37. कवी-ह्रदय की कशमकश को बहुत खूब शब्दों में पिरोया है आपने!
    कविता पढ़ कर आनंद आ गया!

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  38. अलेखक का अलिखित ही जीवन की सज्ञां है वैसे आपने लिखने को बाकी कहां छॊड़ा कुछ

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  39. Surendra jee आपको अग्रिम हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं. हमारी "मातृ भाषा" का दिन है तो आज से हम संकल्प करें की हम हमेशा इसकी मान रखेंगें...
    आप भी मेरे ब्लाग पर आये और मुझे अपने ब्लागर साथी बनने का मौका दे मुझे ज्वाइन करके या फालो करके आप निचे लिंक में क्लिक करके मेरे ब्लाग्स में पहुच जायेंगे जरुर आये और मेरे रचना पर अपने स्नेह जरुर दर्शाए...
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  40. अलिखित का तो पता नहीं, पर जो आप लिख देते हैं
    वह बहुत शानदार होता हो.सुन्दर लेखन यूँ ही अविराम चलता रहे.
    आभार.

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  41. बहुत ही प्यारी कशमकश । पर रोशनी वाले खुशी के टांगिये । दुखों के तो फ्यूज्ड बल्ब हैं ।

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  42. gagar me sagar bharne ki kavi man ki chah me paida hui kashis ko darshati ek shaandaar jaankari...

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  43. wah!!!

    Bahut khub...

    www.poeticprakash.com

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