Tuesday, June 21, 2011

इक दूजे के लिए

नया-नया दरोगा था 
एक दिन गश्त में 
खूंखार हिस्ट्रीशीटर को पा गया 
विधायक जी का पालतू 
गब्बर सिंह 
अचानक पुलिस  की चपेट में आ गया 

विधायक जी ...
जा रहे थे विदेश 
मिला सन्देश 
कार दौड़ाये
सीधे पुलिस स्टेशन आये 

इधर दरोगा जी ..
दहशत दिखा रहे थे 
पर्दाफाश करने को 
डंडा उठा रहे थे 
इन्स्पेक्टर के
 खूंखार चेहरे को देखकर 
हो रही थी 
गब्बर सिंह की हालत खराब 
इतने में देखा ..
नेता जी आ गए 
आँखों में ख़ुशी के आँसू छलके 
निकले यही कलाम ...
'मेरे महबूब तुझे सलाम !'

इधर दरोगा  ने 
नेताजी को देखा ..
ठोंका बड़ा सलाम 
अरे हुज़ूर! हो गया आपका काम 

गब्बर सिंह को छोड़ दिए 
ये कहते हुए ..
'हम बने तुम बने इक दूजे के लिए '  

55 comments:

  1. हा हा हा 'हम बने तुम बने एक दूजे के लिए'...नेता और पुलिस के गठजोड़ पर ज़बरदस्त प्रहार किया है लेकिन इन बेशर्मों को शर्म आये तब न?

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  2. BAHUT BADIYA JI

    हम बने तुम बने इक दूजे के लिए '

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  3. वाह..क्या खूब ...पढ़ कर मन आनंदित हो गया !

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  4. सही है भैय्या बात तो यही है अपने झटके कल चर्चा मंच पर भी देखियेगा :)

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  5. बहुत लाजवाब रचना| धन्यवाद|

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  6. सुरेन्द्र जी, बढ़िया हास्य है और जबर्दस्त कटाक्ष भी है।

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  7. जबरदस्त प्रहा्र किया है आज …………जोर का झट्का बहुत धीरे से दिया है।

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  8. गब्बर और इंस्पैक्टर को मिल कर भी गाना चाहिए - हम बने तुम बने एक तीजे के लिए :))

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  9. ha ha ha ...क्या जोड़ी है ..बहुत बढ़िया.

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  10. वाह क्या बात है। शानदार व्यग्ंय। यही तो आजकल खुलेआम हो रहा है।

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  11. जबरदस्त प्रहा्र किया है आज.......
    सच्चाई को दर्शाती दिल को छू लेने वाली कविता!

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  12. सटीक प्रहार किया है आपने...आभार

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  13. ज़बरदस्त..... सही कटाक्ष है...

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  14. सच्चाई बता दी :)

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  15. bhut badiya tarike se sacchi baat kah di apne...

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  16. हम बने तुम बने इक दूजे के लिए '

    बहुत खूब...

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  17. बढ़िया कटाक्ष करती हुई रचना....

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  18. अरे वाह!
    'मेरे महबूब तुझे सलाम !'

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  19. गब्बर सिंह को छोड़ दिए
    ये कहते हुए ..
    'हम बने तुम बने इक दूजे के लिए '
    vastvikta aur vah bhi itni sundar panktiyon me .bhai vah.

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  20. बहुत बढ़िया, शानदार और ज़बरदस्त रचना लिखा है आपने!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

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  21. बेहद धारदार व्यंग है। एक गठजोड़ ने ही तो देश को बर्बाद कर दिया है। नेताओं में नैतिक मूल्य तो शायद है ही नहीं । आँख का पानी भी मर गया है।

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  22. हकीकत तो यही है हर थाने की ...शुभकामनायें आपको !

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  23. गब्बर सिंह को छोड़ दिए
    ये कहते हुए ..
    'हम बने तुम बने इक दूजे के लिए '

    बेहद नुकीला व्यंग है... ये दोनों मिलकर ही तो देश की नाव डुबोने में लगे हैं, और अपना घर भरके सुखी.........

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  24. सहज सरल चुभन लिए व्यंग्य -इसीलिए तो हो रहें हैं थाने में बलात्कार ,सड़कों पर रोड रेज ,व्यवस्था गत घुन लगा है संस्थाओं को .सशक्त रचना .

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  25. झंझट जी ,फिर से आपके झटके को सलाम .नेता बनाये सारे बिगड़े काम...

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  26. हा हा हा... बहुत खूब... ऐसा ही होता है... "एक दूजे कि लिए" का इससे बेहतर उदाहरण नहीं हो सकता....

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  27. झंझट जी aapke vyang par mera sath sath naman !

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  28. जी हाँ ये तीनो तो एक दूजे के लिए ही बने है.

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  29. यही तो हो रहा है आजकल

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  30. झकझोरक झटका दिया आपने...

    बहुत बहुत बहुत ही सटीक....

    और क्या कहूँ ????

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  31. बहुत अच्छी लगी |बधाई
    आशा

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  32. 'मेरे महबूब तुझे सलाम !'

    व्यंग्य भी हास्य भी !
    साथ में कटाक्ष भी !!


    बहुत ख़ूब !
    एक समर्थ छंदसाधक की हल्की-फुल्की रचना पढ़ना भी अच्छे अनुभव से गुज़रना होता है … बढ़िया भाई सुरेन्द्र जी !

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  33. जबर्दस्त कटाक्ष ....बेहतर उदाहरण नहीं हो सकता....
    आभार

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  34. आज की व्यवस्था पर करार व्यंग है ...

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  35. bahut hi sundr kataksh

    hamre blog par bhi aapka swagat hai :)

    creationsofmansa.blogspot.com

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  36. maza aa gaya bhut sunder sabdo ko jodra hai appney wha.

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  37. आज के राजनेता और पुलिसिया मनोवॄत्ति को अच्छी ख़ुराक दी आपने ....वास्तव में आनन्द आ गया .... आभार !

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  38. दोनों ही एक सिक्के के दो पहलू है ! दोनों एक दुसरे पर निर्भर और हम भगवान भरोसे ! सुन्दर अभिव्यक्ति !

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  39. आपने याद दिलाया, तो मुझे याद आया

    झंझट भाई आपने जो 'टिपण्णी' का झटका दिया तो
    आपके ब्लॉग पर तुरंत आ गया हूँ ,और बस यही गा रहा हूँ

    'हम मिले तुम मिले,एक दूजे के लिए'

    यह गब्बर सिंह के लिए नहीं,आपके और ब्लॉग जगत के सभी मित्रों के लिए है.
    जल्दी ही कारोबार आगे बढ़ाने कि कोशिश करता हूँ.

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  40. 'हम बने तुम बने इक दूजे के लिए '
    एकदम सही.
    यही तो हो रहा है.

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  41. बढ़िया व्यंग्य .आभार

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  42. इसी एक दूजे के बनने ने बेड़ा गर्क कर रखा है |

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  43. सही बात है दोनो एक दूसरे के लिये ही बने हैं। करारी चोट।

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  44. बहुत सुंदर..क्या बात है

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  45. जोरदार व्यंग ।

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  46. मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

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  47. bhiaya main bahut dinon baad aaya hun...kshama kar dena.

    'हम बने तुम बने इक दूजे के लिए '
    aur aaya to aapka ek aur roop dekha bahuuuuuuut achha bhaiya aap kuchh bhi likho bhiya aapka har vidha par poorn adhikaar hai.

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  48. वाह..क्या खूब ...पढ़ कर मन आनंदित हो गया !
    सही बात है दोनो एक दूसरे के लिये ही बने हैं। करारी चोट।

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  49. kya baat kahi hai
    marvelous marvelous.......

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  50. गब्बर सिंह की हालत खराब
    इतने में देखा ..
    नेता जी आ गए
    आँखों में ख़ुशी के आँसू छलके
    निकले यही कलाम ...
    'मेरे महबूब तुझे सलाम !'...bahut accha...behtareen...

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  51. हाहा.. यह गीत अभी सुन रहा था सुबह-सुबह.. क्या से क्या जोड़ दिया आपने तो! :)

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  52. hansate hansate hakikat bata di..kya baat hai ..lajab

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  53. hansate hansate hakikat bata di..kya baat hai ..lajab

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