Tuesday, March 15, 2011

नव गीत

आने को आया है मौसम मनभावन 

           आग राग गाती हैं मौसमी  बहारें |
           सूखे जले पत्तों को बुहारतीं बयारें |

गालों पर फागुन है आँखों में सावन ...

          कोयल मृदुबैनी है तन-मन की काली |
          कौए से  करवाती  शिशु की रखवाली |

छलनाओं के कर में सपनों का दरपन...

           इच्छायें ऊँची ज्यों कचरे पर कचरा |  
           हाथों से गर्दन तक फूलों का गजरा  |

कोठे पर मन बैठा मंदिर में नरतन.....

          आशा तो फ्यूज बल्ब होल्डर में अटकी |
          जीत  हाथ  आते  ही मछली सी छटकी |

गले बँधी टाई सा हार का अपनपन ....
       

43 comments:

  1. आदरणीय सुरेन्द्र सिंह जी
    नमस्कार !
    ..........दिल को छू लेने वाली प्रस्तुती
    होली की बहुत बहुत शुभकामनाएं.

    ReplyDelete
  2. कई दिनों व्यस्त होने के कारण  ब्लॉग पर नहीं आ सका

    ReplyDelete
  3. कोयल मृदुबैनी है तन-मन की काली |
    कौए से करवाती शिशु की रखवाली |
    koyal kitni chalak hoti hai, per mithi taan suna sabko bhram me rakhti hai

    ReplyDelete
  4. .

    कोठे पर मन बैठा मंदिर में नरतन.....

    This is the irony ! What we are and what we pose , are entirely different. Faces are masked. Tough to know the truth.

    Beautiful creation !

    .

    ReplyDelete
  5. आग राग गाती हैं मौसमी बहारें |
    सूखे जले पत्तों को बुहारतीं बयारें |
    दिल को छू लेने वाली प्रस्तुती.
    शुभकामनाएं.

    ReplyDelete
  6. आग राग गाती हैं मौसमी बहारें |
    सूखे जले पत्तों को बुहारतीं बयारें |
    सुन्दर प्रस्तुति .. होली की अग्रिम शुभकामनायें ....

    ReplyDelete
  7. ह्म्म्म बहुत ही अच्छा पोस्ट है ! हवे अ गुड डे \
    मेरे ब्लॉग पर आए !
    Music Bol
    Lyrics Mantra
    Shayari Dil Se

    ReplyDelete
  8. दिल को छू लेने वाली प्रस्तुती.
    .. होली की अग्रिम शुभकामनाएं

    ReplyDelete
  9. गज़ब की रचना है ……………दिल को छू गयी।

    ReplyDelete
  10. आशा तो फ्यूज बल्ब होल्डर में अटकी |
    जीत हाथ आते ही मछली सी छटकी |

    नवीन प्रयोग और बहुत सार्थक ....कमाल है भाई

    ReplyDelete
  11. वाह ...बहुत खूब कहा है आपने ।

    ReplyDelete
  12. गालों पर फागुन है आँखों में सावन ..
    झंझट जी , मुझे तो यह प्रयोग बहुत अच्छा लगा बधाई

    ReplyDelete
  13. सुन्दर प्रस्तुति

    होली की शुभकामनायें

    ReplyDelete
  14. कोयल मृदुबैनी है तन.मन की काली ।
    कौए से करवाती शिशु की रखवाली ।
    छलनाओं के कर में सपनों का दरपन।

    वाह, क्या बात है, वाह..
    नवीन प्रतीकों से सजे इस उत्तम नवगीत के लिए बधाई।

    ReplyDelete
  15. आदरणीय सुरेन्द्र सिंह जी, बहुत ही सुन्दर नवगीत, आभार.

    होली का पवन पर्व की आपको अग्रिम शुभकामनाएं.

    ReplyDelete
  16. इच्छायें ऊँची ज्यों कचरे पर कचरा |
    हाथों से गर्दन तक फूलों का गजरा |

    बहुत ही सुन्दर नवगीत बधाई

    ReplyDelete
  17. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

    ReplyDelete
  18. गुल ने गुलशन से गुलफाम भेजा है,
    सितारो ने आसमान से सलाम भेजा है,
    मुबारक़ हो आपको होली का त्योहार,
    मेने दिल से यह पैगाम भेजा है!!

    सभी मित्रों को होली की अग्रिम शुभकामनाएँ
    मेरी तरफ से सवाई सिंह(आगरा )

    ReplyDelete
  19. कोठे पर मन बैठा मंदिर में नरतन.....

    आशा तो फ्यूज बल्ब होल्डर में अटकी |
    जीत हाथ आते ही मछली सी छटकी |

    गले बँधी टाई सा हार का अपनपन ....

    asha to fuse bulb ke holder me atki........kya kahne hain..:)

    ReplyDelete
  20. आद. सुरेन्द्र जी,
    आशा तो फ्यूज बल्ब होल्डर में अटकी |
    जीत हाथ आते ही मछली सी छटकी |

    गले बँधी टाई सा हार का अपनपन ....
    नए विम्बों के साथ अभिनव प्रतिमानों को स्थापित करता आपका नव गीत पाठक के दिलों को छूकर स्पंदित करने में सक्षम है !
    आभार !

    ReplyDelete
  21. आने को आया है मौसम मनभावन

    आग राग गाती हैं मौसमी बहारें |
    सूखे जले पत्तों को बुहारतीं बयारें |

    गालों पर फागुन है आँखों में सावन ...

    waah waah !

    ReplyDelete
  22. आशा तो फ्यूज बल्ब होल्डर में अटकी |
    जीत हाथ आते ही मछली सी छटकी |
    गले बँधी टाई सा हार का अपनपन ...

    सुन्दर प्रतीक नए विम्बों के साथ आपने बहुत सुन्दर शब्दों में अपनी बात कही है।
    शुभकामनायें।
    .

    ReplyDelete
  23. कोठे पर मन बैठा मंदिर में नरतन.....

    WAH WAH........

    ReplyDelete
  24. आशा तो फ्यूज बल्ब होल्डर में अटकी |
    जीत हाथ आते ही मछली सी छटकी |
    बहुत सुन्दर तरीके से अपनी भावनाओं का चित्रण. वाह...

    ब्लागराग : क्या मैं खुश हो सकता हूँ ?

    ReplyDelete
  25. एकाधिक बार पढ़ा। आगे कुछ कहने की ज़रूरत नहीं।

    ReplyDelete
  26. सुन्दर मनभावन गीत!

    ReplyDelete
  27. आशा तो फ्यूज बल्ब होल्डर में अटकी |
    जीत हाथ आते ही मछली सी छटकी |
    अच्छे झटके दिये वाह बधाई।

    ReplyDelete
  28. आपका ब्लॉग पसंद आया....इस उम्मीद में की आगे भी ऐसे ही रचनाये पड़ने को मिलेंगी

    कभी फुर्सत मिले तो नाचीज़ की दहलीज़ पर भी आयें-
    http://vangaydinesh.blogspot.com/

    ReplyDelete
  29. बहुत प्यारा नवगीत है ,निम्न पंक्तियों में जदीदियत है,नया और मज़ेदार प्रयोग है.

    आशा तो फ्यूज बल्ब होल्डर में अटकी |
    जीत हाथ आते ही मछली सी छटकी |

    गले बँधी टाई सा हार का अपनपन ...

    बधाई आपको इस सुन्दर नवगीत की.

    ReplyDelete
  30. बहुत सुंदर होली कविता
    आप सभी होली की हार्दिक शुभकामनाये
    ब्लॉग पर अनियमितता होने के कारण आप से माफ़ी चाहता हूँ

    ReplyDelete
  31. कोयल मृदुबैनी है तन-मन की काली |
    कौए से करवाती शिशु की रखवाली |

    कुछ नया सा पढने को मिला ......
    तो आपको नवगीत में भी महारत हासिल है .....
    बहुत खूब .....!!

    ReplyDelete
  32. सुरेन्द्र जी आपका नवगीत बहुत ही आकर्षक लगा। बिम्बों में अभिनव प्रयोग सार्थक हैं।

    ReplyDelete
  33. भाई सुरेन्द्र जी अच्छी कविता के लिए बधाई और होली की रंगभरी शुभकामनाएं |

    ReplyDelete
  34. इच्छायें ऊँची ज्यों कचरे पर कचरा |
    हाथों से गर्दन तक फूलों का गजरा |

    कोठे पर मन बैठा मंदिर में नरतन.....

    बहुत सार्थक सुन्दर रचना..बधाई..होली की हार्दिक शुभकामनायें!

    ReplyDelete
  35. कोयल मृदुबैनी है तन-मन की काली |
    कौए से करवाती शिशु की रखवाली |
    bahut khubsurat rachna .
    परिवार सहित होली की शुभ - कामनाएं |

    ReplyDelete
  36. नवमीत बन मिले, अरे अभी तक कहाँ थे भाई!
    झंझट से भड़का था आने की हिम्मत न जुटाई
    बड़ा प्यारा नवगीत है तारीफ करूँ कितनी अब
    इस गीत के साथ ले लो होली की भी बधाई।

    ReplyDelete
  37. होली के पर्व की अशेष मंगल कामनाएं। ईश्वर से यही कामना है कि यह पर्व आपके मन के अवगुणों को जला कर भस्म कर जाए और आपके जीवन में खुशियों के रंग बिखराए।
    आइए इस शुभ अवसर पर वृक्षों को असामयिक मौत से बचाएं तथा अनजाने में होने वाले पाप से लोगों को अवगत कराएं।

    ReplyDelete
  38. खेलैं बूढ़ औ जवान लरिकन संग मा
    भरी फागुनी उमंग आज अंग-अंग मा

    होरिहारन कै फ़ौज चली है बाजै मारू बाजा
    एक रंग मा रंगिगे सगरौ रंक होंय या राजा

    लिहे हाथ पिचकारी अठिलाय कै चली
    भीगी भीगी देह सारी बल खाय कै चली
    संगे सखी-सहेली सारी अरराय कै चली
    जीजा भागे देखौ साली डुडुवाय कै चली

    भाई जी अभी-अभी इतने अछे फगुआ माहौल से मैं चूक ही गया था,,,भगवान का शुक्र है कि आ गया ....कैसे है भाई जी आप होली कि विलंबित शुभकामनायें !!

    ReplyDelete