Wednesday, July 27, 2011

ये भारत है प्यारे ! बिलायत नहीं है

ज़माने   की  नज़रे  इनायत   नहीं है |
मगर फिर भी कोई शिकायत नहीं है |

उसी  के   हैं   चर्चे , तुम्हारे  शहर  में ,
जो अब इस जहां में,सलामत नहीं है |  

यहाँ  लोग  पूजेंगे, जब  हम न  होंगे  
ये भारत है  प्यारे!  विलायत नहीं है | 

जो  सच  बोलता है , अकेला  खड़ा है ,
उसे आज  हासिल , हिमायत नहीं है |

जो शब्दों में उतरा, वो है दर्द दिल का ,
मेरा  शेर  'झंझट' , हिकायत  नहीं है |

54 comments:

  1. जो सच बोलता है , अकेला खड़ा है ,
    उसे आज हासिल , हिमायत नहीं है

    बिलकुल सही कहा आपने....

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  2. जो सच बोलता है , अकेला खड़ा है ,
    उसे आज हासिल , हिमायत नहीं है |

    bahut kub sudar

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  3. ज़माने की नज़रे इनायत नहीं है |
    मगर फिर भी कोई शिकायत नहीं है |............
    एक से बढकर एक पंक्ति, बेहतरीन प्रस्तुति हेतु आभार.

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  4. मेरा भारत महान

    बहुत सुन्दर

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  5. यहाँ लोग जानेंगे , मरने के बाद ,
    ये भारत है प्यारे! बिलायत नहीं है |

    जो सच बोलता है , अकेला खड़ा है ,
    उसे आज हासिल , हिमायत नहीं है |


    बहुत ही शानदार और सटीक अभिव्यक्ति।

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  6. जो शब्दों में उतरा,वह है दर्द दिल का ,
    मेरा शेर 'झंझट' , हिकायत नहीं है |

    बहुत सुन्दर रचना

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  7. जो सच बोलता है , अकेला खड़ा है ,
    उसे आज हासिल , हिमायत नहीं है |

    बहुत खूब....

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  8. यहाँ लोग जानेंगे , मरने के बाद ,
    ये भारत है प्यारे! बिलायत नहीं है |
    जो सच बोलता है , अकेला खड़ा है ,
    उसे आज हासिल , हिमायत नहीं है |


    बहुत सुन्दर..यथार्थपरक ग़ज़ल....

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  9. आपका तहेदिल से शुक्रिया मेरे ब्लॉग पे आने के लिए और शुभकामनाएं देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद/शुक्रिया..
    9 दिन तक ब्लोगिंग से दूर रहा इस लिए आपके ब्लॉग पर नहीं आया उसके लिए क्षमा चाहता हूँ ...आपका सवाई सिंह राजपुरोहित

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  10. ज़माने की नज़रे इनायत नहीं है |
    मगर फिर भी कोई शिकायत नहीं है |

    खूब कहा है आपने. सुंदर ग़ज़ल.

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  11. यहाँ लोग जानेंगे , मरने के बाद ,
    ये भारत है प्यारे! बिलायत नहीं है |........वाह बहुत खूब


    भारत ...अब भारत नहीं रहा और ना ही वो विलायत बन पाया...
    अधर में लटक गया .......

    anu

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  12. आपकी यह रचना दिल को छु गयी... उम्दा
    मेरा भारत महान

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  13. Sach hi kaha hai ..fir bhi Mera Bharat mahan aur aap ki kalam bhi..

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  14. Sach hi kaha hai ..fir bhi Mera Bharat mahan aur aap ki kalam bhi..

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  15. जो सच बोलता है , अकेला खड़ा है ,
    उसे आज हासिल , हिमायत नहीं है |
    Bahut teekhe jhtke haen ???????

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  16. जो सच बोलता है , अकेला खड़ा है ,
    उसे आज हासिल , हिमायत नहीं है ..

    बहुत खूब ... क्या लाजवाब शेर है इस गज़ल का .. ये ज़माना बहुत हरजाई है ...

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  17. जो शब्दों में उतरा,वह है दर्द दिल का ,
    मेरा शेर 'झंझट' , हिकायत नहीं है |

    वाह! क्या बात है सुरेन्द्र भाई.... शानदार ग़ज़ल...
    सादर....

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  18. बहुत सुन्दर प्रस्तुति सुरेन्द्र जी, बधाई

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  19. जय हो सच को झूठ कहना सीखो भईया ये भारत है विलायत नही

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  20. जो शब्दों में उतरा,वह है दर्द दिल का ,
    मेरा शेर 'झंझट' , हिकायत नहीं है |

    आप तो झटके पे झटका दिए जाते है झंझट भाई.
    एक से एक जोरदार.

    शानदार प्रस्तुति के लिए आभार.

    मेरी पोस्ट आपका इंतजार कर रही है.

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  21. जो सच बोलता है , अकेला खड़ा है ,
    उसे आज हासिल , हिमायत नहीं है |

    एकदम सही कहा है भाई

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  22. जो सच बोलता है , अकेला खड़ा है ,
    उसे आज हासिल , हिमायत नहीं है

    सच्चाई को उजागर करती खूबसूरत अभिव्यक्ति. आभार.
    सादर,
    डोरोथी.

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  23. ज़माने की नज़रे इनायत नहीं है |
    मगर फिर भी कोई शिकायत नहीं है |
    बहुत बढ़िया रचना । शुभकामनाएँ ...

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  24. 'ये भारत है प्यारे! बिलायत नहीं है' एक और बेहतरीन सुन्दर अभिव्यक्ति

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  25. अरे वाह!...बहुत ख़ूब

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  26. यहाँ लोग जानेंगे , मरने के बाद ,
    ये भारत है प्यारे! बिलायत नहीं है |

    जो सच बोलता है , अकेला खड़ा है ,
    उसे आज हासिल , हिमायत नहीं है |

    बहुत खूब कहा है आपने ।

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  27. जो शब्दों में उतरा,वह है दर्द दिल का ,
    मेरा शेर 'झंझट' , हिकायत नहीं है |

    बहुत खूब... बहुत सुन्दर रचना...

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  28. जो सच बोलता है , अकेला खड़ा है ,
    उसे आज हासिल , हिमायत नहीं है ।

    एक-एक शेर सच को उजागर करता हुआ।
    बढ़िया ग़ज़ल।

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  29. जो शब्दों में उतरा,वह है दर्द दिल का ,
    मेरा शेर 'झंझट' , हिकायत नहीं है |
    बहुत खूब लिखा है आपने !शानदार और सार्थक रचना!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

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  30. यहाँ लोग पूजेंगे, जब हम न होंगे
    ये भारत है प्यारे! विलायत नहीं है |
    बहुत सही कहा है, मरने के बाद दिल में जगह हो न हो ड्राइंगरूम में तस्वीर लगाकर माला ज़रूर डाल देंगे।

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  31. bahut kadwe bachan lekin bahut hi satik kaha hai aapne.

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  32. उम्दा ग़ज़ल.

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  33. क्या कहूँ ?शब्द छूट से रहे है..तारीफ़ के अच्छी लगी रचना .

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  34. जो सच बोलता है अकेला खडा है ,
    उसे आज हासिल हिमायत नहीं है .
    मनोज जी ,सुभद्रा कुमारी चौहान की "महालक्ष्मी बेटी स्वरूपा "पर बेहतरीन मन मुदित करने वाली कविता आपने पढवाई .शुक्रिया .

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  35. जो सच बोलता है अकेला खडा है ,
    उसे आज हासिल हिमायत नहीं है .
    झन झट जी , बेहतरीन मन मुदित करने वाली कविता आपने पढवाई .शुक्रिया .माफ़ी चाहूंगा दो रेडिओ स्टेशन एक साथ लग गए थे पहली टिपण्णी में .

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  36. जो सच बोलता है , अकेला खड़ा है ,
    उसे आज हासिल , हिमायत नहीं है |

    जो शब्दों में उतरा, वो है दर्द दिल का ,
    मेरा शेर 'झंझट' , हिकायत नहीं है |

    umda ghazal! bahut khoob Surendar ji!

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  37. जो शब्दों में उतरा, वो है दर्द दिल का ,
    मेरा शेर 'झंझट' , हिकायत नहीं है |
    बहुत खूब एक से बढ कर एक शेर ।
    हिकायत का मतलब तो मुझे नही मालूम, कहीं ये शिकायत तो नही ।

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  38. सुन्दर रचना। मुझे हिकायत शब्द का अर्थ नहीं मालूम!

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  39. जो सच बोलता है , अकेला खड़ा है ,
    उसे आज हासिल , हिमायत नहीं है |


    Very impressive couplets. Quite realistic and thoughtful. In the world full of liars , we hardly find anyone honest. Unfortunately the honest people do not get the required support also. Ultimately they wither untimely . But of course few can withstand the hardships and opposition as well.

    .

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  40. आदरणीया आशा जी , भाई अनुराग शर्मा जी ;

    'हिकायत' का अर्थ है ..'किसी पूर्व वर्णित गाथा अथवा कहानी का उद्धरण/अंश'

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  41. kisi ek ashaar ki baat karna bemani hogi jab puri ghazal hi umda ho..kabhi kabhi itne acchi tarike se meter mein bandhi ghazal dekhne ko milti hain..hardik badhayee

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  42. ज़माने की नज़रे इनायत नहीं है |
    मगर फिर भी कोई शिकायत नहीं है |

    Aapke kayal ho gaye hum Surendra Ji.. Aabhar..

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  43. यहाँ लोग पूजेंगे, जब हम न होंगे
    ये भारत है प्यारे! विलायत नहीं है |

    जो सच बोलता है , अकेला खड़ा है ,
    उसे आज हासिल , हिमायत नहीं है |
    वाह कितनी सटीक बात कही। बहुत खूब बधाई।

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  44. उसी के हैं चर्चे , तुम्हारे शहर में ,
    जो अब इस जहां में,सलामत नहीं है |

    यहाँ लोग पूजेंगे, जब हम न होंगे
    ये भारत है प्यारे! विलायत नहीं है |

    जो सच बोलता है , अकेला खड़ा है ,
    उसे आज हासिल , हिमायत नहीं है |


    बेहतरीन शेर....बेहतरीन ग़ज़ल ....

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  45. अनुभव की बातें। अच्छा हुआ,आपने शेयर किया।

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  46. उसी के हैं चर्चे , तुम्हारे शहर में ,
    जो अब इस जहां में,सलामत नहीं है |
    यह हुई ना सही बात....

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  48. मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
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  49. सच्चे लोग अलग - थलग हो गए है ! बहुत सुन्दर

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  50. उसी के हैं चर्चे , तुम्हारे शहर में ,
    जो अब इस जहां में,सलामत नहीं है |

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