Wednesday, December 8, 2010

धिक् साखी सामंत की..

धिक्  साखी सामंत की , धिक् बोलो !
        मुहफट लज्जारहित सयानी
       लटक-झटक नखरही गुमानी
       जहरबुझी  जिह्वा  जगजानी
चैनलिया इन्साफ के जरिये
किसी के   जीवन अंत  की , धिक् बोलो
      टी आर पी   बढ़ानेवाली
     असभ्यता सरसाने वाली
     संस्कृती  झरसाने वाली
काली-अंग्रेजियत नमूना
मीका-कथा  अनंत  की , धिक् बोलो
  तड़क-भड़क कतरन की गुडिया
   सेक्स उभारक     जादू पुड़िया
   नज़र-नज़ारा  नजरी कुडिया
चुना स्वयं वर ठोकर मारी 
टी वी    वाले     कंत    की , धिक् बोलो 
  बड़बोली   आईटम    धमाका 
  डाले रोज   इमोशनल   डाका 
  क्या होगा अब देश का काका ?
नारी की गौरव-गरिमा में 
घोल रही  छल-छंद   की  , धिक् बोलो

20 comments:

  1. अच्छी रचना , बधाई आज पहली बार आपके ब्लॉग पर आया हूँ बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति ......
    कभी हमारे ब्लॉग पर भी आए //shiva12877.blogspot.com

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  2. लो जी साहब हमने भी धिक बोल दी
    मजा आ गया

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  3. आप के ब्लोग पर आ कर आनन्द मिला ! आभार मेरे हिंदी ब्लोग पर आने के लिए ! मेरे ब्लोग पर भी दस्तक दें व फ़ोलो कर मार्ग प्रशस्त करें !

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  4. धिक् बोलो ! मैंने भी बोल दिया !,

    सुन्दर रचना.

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  5. कुछ ख़ास बात लगती है झंझट में ! हार्दिक शुभकामनायें !

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  6. बहुत सटीक ....अच्छा व्यंग ..

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  7. अच्छा व्यंग है.बधाई.

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  8. आपका अंदाज स्ट्रीट एक्ट के लिए और उद्देश्य पूर्ण नाटय प्रस्तुतियों के लिए एकदम प्रभावी है...मंचन क्षेत्र में आपकी धाक निश्चित रूप से होगी..बधाई

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  9. काली-अंग्रेजियत नमूना
    मीका-कथा अनंत की

    तीखा व्यंग्य लिखा है आपने...
    ...सभी विशेषण उस पर बिल्कुल फिट बैठ रहे हैं।

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  10. लाज़वाब व्यंग ....

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  11. Hahahah.. karara vyangya..

    DHIKKK!!! aapki behad maang par maine bhi bol hi dia :)

    Keep writting :)

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  12. मुहफट लज्जारहित सयानी
    लटक-झटक नखरही गुमानी
    जहरबुझी जिह्वा जगजानी
    bilkul sahi sameekha.

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  13. धिक् बोलो !

    ये धिक्, धिक् क्या है .....?

    ये धिक्,धिक्....

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  14. बहुत खूब क्या कहने!
    क्रिएटिव मंच आप को हमारे नए आयोजन
    'सी.एम.ऑडियो क्विज़' में भाग लेने के लिए
    कल रविवार, 12 दिसंबर, प्रातः 10 बजे आमंत्रित करता है.आभार

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  15. बड़बोली आईटम धमाका
    डाले रोज इमोशनल डाका
    क्या होगा अब देश का काका ?
    xxxxxxxxxxxxxx
    हमने भी कह दिया धिक् ....गजब का व्यंग्य ...शुक्रिया

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