Thursday, January 27, 2011

ग़ज़ल ...मीत न बात पुरानी लिख

मीत  न  बात  पुरानी  लिख |
गुम  हो गयी जवानी  लिख |

सूनी मांग   देख   ले  पहले ,
फिर  ग़ज़लें  रूमानी  लिख |

बड़े , बड़प्पन  से   खाली हैं ,
तू भी  अब  मनमानी लिख |

पत्ते  पर है  जान  पिता  की ,
बिटिया  भई  सयानी लिख |

'मोनालिसा' स्वप्न है प्यारे ,
झाँसी  की   मर्दानी   लिख |

लंतरानियों के दिन गुजरे
सच्ची कोई कहानी लिख |

शब्दों की नक्काशी क्या है  ?
दिल की बात जुबानी लिख  |

पहले कुछ करके दिखला फिर 
दुनिया  आनी-जानी  लिख |

सूख रहा चन्दन का बिरवा ,
कहाँ  मिलेगा पानी  लिख  |

इक मछली फँस गयी जाल में
फूट  के  रोया पानी  लिख |

पैबन्दों में देश की अस्मत ,
राजा  की   शैतानी   लिख |

देश के  गद्दारों  के   हिस्से ,
बस चुल्लू भर पानी लिख |

31 comments:

  1. देश के गद्दारों के हिस्से ,
    बस चुल्लू भर पानी लिख |

    वाह ! क्या खूब लिखा है ……………बहुत सुन्दर और सामयिक प्रस्तुति।

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  2. देश के गद्दारों के हिस्से ,
    बस चुल्लू भर पानी लिख
    wah. kya baat likhi hai.

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  3. बहुत सुन्दर और सामयिक प्रस्तुति।

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  4. ये बात !, अत्यंत ही सुन्दर.........वाह जी वाह सुरेद्र जी, सच कहूँ तो इससे सुन्दर और क्या हो सकता है. आपका तहेदिल से आभार.

    "Really inspiring"

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  5. सूनी मांग देख ले पहले ,
    फिर ग़ज़लें रूमानी लिख |
    पत्ते पर है जान पिता की ,
    बिटिया भई सयानी लिख |.....
    क्या कहूं सुरेन्द्र जी अन्दर तक झंझ्कोरती हुई पंक्तियाँ....आप वाकई बहुत सटीक लिखते हैं !

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  6. देश के गद्दारों के हिस्से ,
    बस चुल्लू भर पानी लिख |
    2 good

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  7. देश के गद्दारों के हिस्से ,
    बस चुल्लू भर पानी लिख |
    वाह क्या बात है ...आज इसकी सकत आवश्यकता है ...शुक्रिया

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  8. शब्द-शब्द अनमोल.
    वर्तमान समदर्भों में बिल्कुल सटीक प्रस्तुति. वाह...

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  9. मीत न बात पुरानी लिख |
    गुम हो गयी जवानी लिख |
    ....बडी सुंदर गजल.

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  10. वाह वाह वाह और बस वाह
    गजल को पढ कर और कुछ सूझ नही रहा

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  11. इक मछली फँस गयी जाल में
    फूट के रोया पानी लिख |

    पत्ते पर है जान पिता की ,
    बिटिया भई सयानी लिख |

    dil ko choo lene waali panktiya hain...

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  12. इक मछली फ़ंस गई जाल में'
    फ़ूट के रोया पानी लिख।
    बेहतरीन शे'र , ख़ूबसूरत ग़ज़ल।

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  13. सूनी मांग देख ले पहले ,
    फिर ग़ज़लें रूमानी लिख |

    मोनालिसा' स्वप्न है प्यारे ,
    झाँसी की मर्दानी लिख |

    सुभानाल्लाह ....
    झंझट जी आपने तो सारे झंझट ही खत्म कर दिए

    बहुत खूब ...
    गज़ब हैं सारे शे'र ....!!

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  14. भाई सुरेन्द्र जी,
    'मोनालिसा' स्वप्न है प्यारे ,
    झाँसी की मर्दानी लिख |

    क्या कमाल की ग़ज़ल है ,हर शेर पर मेरी दाद कबूल फरमाएं!
    भाई,एक बार फिर अच्छी ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद !

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  15. बहुत खूब
    बहुत देर से आना हुआ --शर्मिंदा हु -
    कभी समय मिले तो हमारे ब्लॉग//shiva12877.blogspot.com पर भी अपनी एक नज़र डालें

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  16. शानदार शब्दों में कई व्यथाएं एकसाथ ​पिरो डाली हैं आपने। गज़ब का लहजा है बात को कहने का। बेबाक कलमकार हूं, अनुबंध नहीं हूं। बहुत अच्छा लगा। मेरी तरफ से बधाई स्वीकार करें।

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  17. इक मछली फँस गयी जाल में
    फूट के रोया पानी लिख |

    वाह वाह वाह, gajab ka sher, aur utni hi achchi gazal.

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  18. सूनी मांग देख ले पहले ,
    फिर ग़ज़लें रूमानी लिख |

    बड़े , बड़प्पन से खाली हैं ,
    तू भी अब मनमानी लिख |
    ...वाह! बहुत खूब!.

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  19. कमाल की ग़ज़ल है. बहुत ही सुंदर कही है. वाह.

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  20. मोनालिसा' स्वप्न है प्यारे ,
    झाँसी की मर्दानी लिख |

    बहुत खूबसूरत गज़ल लिखी है ...

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  21. शब्दों की नक्काशी क्या है ?
    दिल की बात जुबानी लिख ....

    शानदार प्रस्तुतीकरण !

    .

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  22. बहुत सुन्दर गज़ल है आपकी.. शब्द शब्द मोती जैसे ..खूबसूरत ..

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  23. सच्‍चे मानस के मोती।

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  24. very nice binding of words .. too good gajal

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  25. देश के गद्दारों के हिस्से ,
    बस चुल्लू भर पानी लिख |
    उत्तम।

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  26. क्या कहूँ इस रचना के भाव और कला सौन्दर्य पर...

    अब मेरा प्रयास रहेगा कि आपका लिखा कुछ भी पढने से न छूटे...

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  27. पत्ते पर है जान पिता की ,
    बिटिया भई सयानी लिख

    छोटी बहर में लिखी कमाल की ग़ज़ल है ... बहुत ही लाजवाब ... सुभान अल्ला ...

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