Saturday, January 29, 2011

आपकी लेखनी अबाध गति से चलती रहे

                       आज   मैं आप सभी कलम के सजग सिपाहियों  का, मेरे ब्लॉग पर आने और अपने अनमोल कमेंट्स देने का बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूँ | आप सब  का स्नेह इसी तरह बना रहे ,प्रभु से प्रार्थी हूँ | एक बात और कहना चाहूँगा कि मेरा अपना कम्प्यूटर या लैपटॉप नहीं  है , हाँ ऑफिस में जरूर है |उसी पर कुछ  समय निकालकर थोड़ा-बहुत लिख पढ़ लेता हूँ |
                       मैं ब्लाग पर आप सब का सान्निध्य  पाकर बहुत हर्षित हूँ और इसका पूरा श्रेय जाता है मेरे छोटे सुपुत्र धनञ्जय को | इस समय वह बी. टेक . (आई .टी .) अंतिम वर्ष का छात्र है | अगस्त २०१० में उसने खेल-खेल में ही मेरा ब्लॉग बना दिया | माँ वीणापाणि की उस पर भी कृपा है , वह भी लेख और कवितायें लिखता है जो अपने ब्लॉग 'अधूरे सपने ' पर पोस्ट करता रहता है |
                                       आप सब से, एक दूसरे के  कभी आमने-सामने न होने के बावजूद न जाने कैसा आत्मीय सम्बन्ध जुड़ गया है जो सदैव एहसास दिलाता रहता है कि बहुत दूर-दूर रहते हुए भी हम एक दूसरे के कितने करीब हैं ! हाँ ,कुछ रचनाकार जैसे 'मानवीय सरोकार' के भाई डा० डंडा लखनवी जो कई वर्षों  पूर्व कविमंचों पर अन्तरंग हुआ करते थे, भी मिले | इतने दिनों बाद का पुनर्मिलन बहुत सुखदाई रहा |  जितना पहुँच पाता हूँ ,इस ब्लॉग जगत के लेखकों को पढ़ने का प्रयास करता हूँ | जहाँ वरिष्ठ रचनाकारों को नमन करने का मन करता है, वहीँ दूसरी ओर नवोदित रचनाकारों की अभिव्यक्ति देखकर मन बाग़-बाग़ हो जाता है | स्थापित लेखकों / लेखिकाओं का रचना- संसार इतना व्यापक  दिखता है कि उसमें प्रवेश करते ही खो जाना पड़ता है और यह खो जाना ही असीम आनंद देता है |
                    मैं खुले ह्रदय से स्वीकारता हूँ कि ब्लॉग जगत में आने के बाद मेरा सोया रचनाकार जगा  है | इसका काफी श्रेय आप सब को भी जाता है | आज कोई रचना पोस्ट करने बैठा था मगर पता नहीं क्यों यह सब अपने आप लिख गया | आप  सब को पुनः कोटि-कोटि  धन्यवाद .......बहुत-बहुत हार्दिक शुभ कामनायें | आप सब स्वस्थ रहें , सुखी रहें , सपरिवार सानन्द रहें |

              आपकी लेखनी अबाध गति से चलती रहे , साहित्य को समृद्ध करती रहे , देश और समाज को दिशा देती रहे |


          

23 comments:

  1. चलो आपके छोटे सुपुत्र धनञ्जय के माध्यम से आप ब्लॉग के दुनिया में आयें, यह जानकार बहुत अच्छा लगा.. यहाँ बहुत से हैं जो किसी न किसी के माध्यम से और प्रोत्साहन से ब्लॉग्गिंग कर कभी आमने-सामने न होने के बावजूद भी एक मंच पर आकर अपने विचारों भावनाओं को साझा कर रहें हैं... आपकी लेखनी भी अबाध गति से चलती रहे , साहित्य को समृद्ध करती रहे , देश और समाज को दिशा देती रहे, यही हमारी भी शुभकामना हैं.. |

    ReplyDelete
  2. आपके अन्दर का सुसुप्त रचनाकार यहाँ नित नये सृजन के द्वारा आपकी आत्मिक संतुष्टि के साथ ही आपके पाठकों को आपकी रचनाओं के आनन्द सागर में गहराई तक गोते लगवाता रह सके । इसी शुभकामना के साथ...

    ReplyDelete
  3. नमस्कार........आपकी रचना वाकई तारीफ के काबिल है
    मैं ब्लॉग जगत में नया हूँ, कृपया मेरा मार्गदर्शन करें......

    http://harish-joshi.blogspot.com/

    आभार.

    ReplyDelete
  4. वाह झंझट साहब ये शुभकामनाओ का झटका भी बढिया रहा।
    हमारी भी शुभकामनाये स्वीकार किजिए

    आपका सफर यूँ ही चलता रहे,
    उजाला राहो मे यूँ ही मिलता रहे,
    आप लिखते रहो हम पढते रहें,
    आपका ब्लाग यूँ ही खिलता रहें

    शुभकामनायें

    ReplyDelete
  5. aapke bete ke hum bhi shukraguzaar hain , jisne aapko hamare bich lane ka karya kiya

    ReplyDelete
  6. सुरेन्द्र जी
    आपका लेखन सतत चलता रहे और नित नयी ऊँचाइयों को छुये यही दुआ करती हूँ…………आभार ।

    ReplyDelete
  7. सुरेन्द्र जी,
    मेरी तरफ से भी 'same to you' या यूँ कहिये की 'same to all'
    :-)

    ReplyDelete
  8. बस यह रचनाकार जागृत रहे और हमें आपकी रचनाएँ पढने को मिलती रहें

    ReplyDelete
  9. हमारी भी शुभकामनाये स्वीकार किजिए

    ReplyDelete
  10. धन्यवाद और शुभकामनायें.

    ReplyDelete
  11. आपके छोटे पुत्र का योगदान वास्तव में सराहनीय है।नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।

    ReplyDelete
  12. अच्छी रचना के लिए बधाई
    आशा

    ReplyDelete
  13. आपकी रचनाएं प्रभावशाली होती हैं। आप इसी तरह निरंतर लिखते रहें..शुभकामनाएं।

    ReplyDelete
  14. आपका लेखन प्रभावी है ... सब पसंद तो करेंगे ही ... आप ऐसे ही लिखते रहें ..

    ReplyDelete
  15. आप ऐसी ही लिखते रहे और हम आपका अनुसरण करते रहे। उपर वाला आपकी लेखनी को और ताकत दे।

    ReplyDelete
  16. हर व्यक्ति के अंदर कुछ न कुछ रचनात्मक होता है जो कभी न कभी बाहर निकलता है...
    आपके बेटे को धन्यवाद जो आपने इस रूप को बाहर निकाला
    यह भी सही है कि हम आपस में शायद कोई किसी से मिला हो मगर सबसे आत्मीयता है...एक अपनापन है...
    बहुत अच्छी पोस्ट

    ReplyDelete
  17. आपकी रचना वाकई तारीफ के काबिल है

    ReplyDelete
  18. आपकी रचना अंतर्मन को प्रभावित करने वाली है ...आपका आभार

    ReplyDelete
  19. ब्लॉग जगत की ये ही तो विशेषता है इसके माध्यम से जो रिश्ते बनते हैं वो कमाल होते हैं...कभी कभी तो लगता है के अरे...मैं कहीं इस शख्श से पहले मिल तो नहीं चुका...लगता ही नहीं के ये सम्बन्ध अभी के हैं...
    नीरज

    ReplyDelete
  20. @आपकी लेखनी अबाध गति से चलती रहे , साहित्य को समृद्ध करती रहे , देश और समाज को दिशा देती रहे |

    ReplyDelete
  21. ब्लॉग ने हम सब के अंदर के रचनाकार को जगाया है।
    आपकी लेखनी भी अबाध गति से चलती रहे।
    आपके पुत्र को शुभकामनाएं।

    ReplyDelete
  22. आपकी एवं धनञ्जय जी की लेखनी , सतत चलती रहे और साहित्य कों समृद्ध करती रहे।

    ReplyDelete
  23. सुसंस्कारी santaan पाना, sabke bhagy में नहीं होता...आपने पाया है,जानकर बड़ा हर्ष हुआ.....

    यूँ , मुझे लगता है ब्लॉग लिखने वाले अधिकांश लोगों के साथ यही बात है,जैसा आपने अपने विषय में कहा है...इससे जुड़कर लोगों ने जहाँ एक सामान विचार धारा वाला वृहत संसार पाया है,वही पढ़ते और लिखते ही लोगों के अंतस का रचनाकार भी जगा है...
    सतत सुन्दर लिखते रहें,यही शुभकामना है...

    ReplyDelete