देश तो है आज़ाद मगर आज़ादी का आभास चाहिए
नेता हमें सुभाष चाहिए
एक अकेले अपने बल पर जिसने लड़ी लड़ाई
'आजाद हिंद' के नायक ने खुद अपनी फ़ौज बनाई
'दो मुझे खून-आज़ादी दूंगा' वीर- बाँकुरा बोला
सुनकर हर हिन्दुतानी ने रँगा बसंती चोला
आज़ादी के लिए समर्पित जीवन की हर साँस चाहिए
साँस-साँस में देशप्रेम का भाव भरा उच्छ्वास चाहिए
नेता हमें सुभाष चाहिए
आज देश का लोकतंत्र है फँसा हुआ दलदल में
बस कुर्सी हासिल करने की होड़ लगी हर दल में
क्रांतिकारियों के सपनों का भारत वर्ष कहाँ है
मातम ही मातम है आज़ादी का हर्ष कहाँ है
उजड़े हुए चमन में फिर से लहराता मधुमास चाहिए
जय 'जय हिंद 'से गुंजित फिर से धरा और आकाश चाहिए
नेता हमें सुभाष चाहिए