Wednesday, September 14, 2011

अपने भारतवर्ष की पहचान है हिंदी

अपने     भारतवर्ष      की     पहचान    है    हिंदी |
गौरव है ,   गरिमा  है ,    हिन्दुस्तान    है    हिंदी | 


तुलसी    की   चौपाई   और  कबीरा    की   साखी ,
सूर - श्याम   की   मनमोहक   मुस्कान  है  हिंदी |


जायसी   के  'पद्मावत' में  यह  ' नागमती की पीर'
प्रेम   दिवानी   मीरा    का    'विषपान'    है   हिंदी |


केशव  का  पांडित्य   और   रसलीन  की  रसधारा,
श्याम  रंग   में   रँगी    'भक्त  रसखान'   है    हिंदी |


खुसरो   की   मुंहबोली ,  नूरमुहम्मद   की   प्यारी,
रहिमन   के   मन   बसी -  रसीली  तान  है  हिंदी |


भूषण   की   ललकार ,  सुभद्रा   की   'झांसी वाली',
कभी   शब्द    तो   कभी   शब्द -संधान   है   हिंदी |


महाप्राण    की   ' पथ  पर - पत्थर तोड़ रही  बाला ' ,
दादू   औ   रैदास    का   'हरिगुण गान'    है    हिंदी |


दिनकर  की ' हुंकार '  बिहारी  की ' नावक  के  तीर '
नीर  भरी   दुःख   की  बदली   अनजान   है    हिंदी  |


नागर - 'खंजन  नयन ' यही  बच्चन  की  मधुशाला ,
घनानंद    की   ' आँगन   खड़ी   सुजान '   है    हिंदी  |


भोजपुरी,  अवधी, ब्रजभाषा , मैथिलि  का लालित्य ,
माँ   के   आँचल    जैसी  -  ममतावान   है      हिंदी  |


आओ   करें   प्रणाम   मातृभू    की  इस  ममता  को ,
भारत  और   भारती     का    सम्मान    है       हिंदी  | 

Tuesday, August 30, 2011

अलिखित

मुझे लिखना है 
हाँ , बहुत कुछ लिखना है
किन्तु 
कहाँ से शुरू करूँ ?
क्या लिखूँ प्रारंभ में ?

एक पंक्ति में
लटकते हुए 
अनगिनत
रंगीन बल्बों की तरह 
कई-कई बातें ....
शिकायतें , आक्रोश , क्षोभ-
ग्लानि , दुःख , पश्चाताप...
और 
इन्हीं के बीच 
दिपदिपाते जुगनू 
क्षणिक खुशियों के !

किस को कहाँ स्थान दूँ ?
कहाँ-कहाँ टाँक दूँ ?
किस-किस को ...

बस 
इसी कशमकश में 
जूझने लगता हूँ ..
जब भी उठाता हूँ-
कलम और कागज़  
और
हर बार रह जाता है 
अलिखित 
बहुत कुछ......


Tuesday, August 16, 2011

अन्ना का समर्थन करें

आप  सभी  को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ ..

आइये हम सब  भ्रष्टाचार मुक्त भारत निर्माण के लिए-- सम्माननीय  अन्ना हजारे जी के नेतृत्व में-- जन लोकपाल बिल बनाने के लिए--संवेदनहीन एवं तानाशाह सरकार के विरुद्ध जारी देशव्यापी जन आन्दोलन को अपना पूर्ण समर्थन देकर इसे सफल बनाएँ.....

Friday, August 5, 2011

....बड़े लोग हैं !

चाँद   तारे  दिखाते,  बड़े   लोग  हैं |
देश   आगे   बढाते,  बड़े   लोग  हैं |
छीनकर रोटियाँ,हम गरीबों की ये ,
एक  टुकड़ा  दिखाते, बड़े  लोग  हैं |

माँगने   वोट  आते,  बड़े  लोग  हैं |
जीत संसद में जाते, बड़े  लोग  हैं |
झूठे वादों की घुट्टी पिलाकर हमें ,
कोठी अपनी बनाते,  बड़े  लोग हैं |

योजनायें    बनाते ,   बड़े लोग  हैं |
हक करोड़ों का खाते, बड़े  लोग हैं |
देखने  को   हमारी  फटी  जिंदगी ,
हेलीकाप्टर से आते, बड़े  लोग  हैं |

आग   पहले    लगाते,  बड़े   लोग   हैं | 
फिर  बुझाने  भी आते, बड़े   लोग   हैं |
राख हो जातीं जब अम्न की बस्तियाँ,
तब  कुआँ  ये   खुदाते, बड़े   लोग   हैं |

टू  जी   टेल्फोन  खाते,  बड़े   लोग  हैं |
राष्ट्र मंडल     चबाते ,    बड़े   लोग  हैं |
लाल बत्ती   मिले  या  मिलें  गड्डियाँ ,
रोज़  बिकते- बिकाते,  बड़े   लोग  हैं |

Wednesday, July 27, 2011

ये भारत है प्यारे ! बिलायत नहीं है

ज़माने   की  नज़रे  इनायत   नहीं है |
मगर फिर भी कोई शिकायत नहीं है |

उसी  के   हैं   चर्चे , तुम्हारे  शहर  में ,
जो अब इस जहां में,सलामत नहीं है |  

यहाँ  लोग  पूजेंगे, जब  हम न  होंगे  
ये भारत है  प्यारे!  विलायत नहीं है | 

जो  सच  बोलता है , अकेला  खड़ा है ,
उसे आज  हासिल , हिमायत नहीं है |

जो शब्दों में उतरा, वो है दर्द दिल का ,
मेरा  शेर  'झंझट' , हिकायत  नहीं है |

Monday, July 18, 2011

कोई ऐसी प्रीति करे तो

                 कोई ऐसी प्रीति करे तो 
प्रेम भवन की ड्योढ़ी पर ही, काट के अपना शीश धरे तो || कोई ऐसी प्रीति करे तो ||
      
               डरता   कहाँ   मरण  के  भय से 
               कोई     प्यार    निभाये      ऐसे 
               जल जाना ही जिसकी परिणति 
               नेह   पतिंगे   का   ज्यों   लौ  से 
प्रेम यज्ञ  की ज्वाला में , बन हव्य ,स्वयं को हवन करे तो ||कोई ऐसी प्रीति करे तो ||

               मछली जल में ही जीती है 
               सदा   प्रेम अमृत  पीती  है 
               पर विछोह होते ही पल में 
               प्राण निछावर  कर देती है 
कोई देवता के चरणों में , अर्पित जीवन सुमन करे तो ||कोई ऐसी प्रीति करे तो ||

               प्रीति  चन्द्र से  करे चकोरी 
               निरखे सदा  प्रेम रस  बोरी 
               जीवन   इंतज़ार  में   बीते 
               मगर न टूटे आश की डोरी 
अगम,अलभ्य रूप से ऐसी , चाहत की इक डोर जुड़े तो || कोई ऐसी प्रीति करे तो ||

               जहाँ वासना.... ..प्यार कहाँ है?
               काम जहाँ... निष्काम कहाँ है ?
               त्याग और बलिदान का पथ है, 
               प्रेम यहाँ..........आराम कहाँ है ?
प्रेम दिवानी मीरा सा, हँस-हँस कोई विषपान करे तो || कोई ऐसी प्रीति करे तो ||
               

Saturday, July 9, 2011

इंसान और राक्षस

दिल करता है 
नोच डालूँ नकाब 
अपने चेहरे का 

नोच-नोच कर फेंक दूं 
वे सारे पर सुर्खाब के  
जो लोगों ने 
जबरदस्ती 
मुझमे जमा रक्खा है 

मैं 
जो अब तक 
आदमी नहीं बन सका 
बेवजह 
लोगों ने 
फ़रिश्ता बना रक्खा है 

भरी बाज़ार में नंगा कर दूँ
अपने अंतस में छिपे शैतान को 
और
 चिल्ला-चिल्ला कर बता दूँ
हर खासो आम को 
अपनी असलियत 
दिखा दूँ ...
शराफत के परदे में 
पल रही हैवानियत 

जिंदगी और मौत 
में 
क्या फर्क है ....
भूल जाऊँ
पश्चाताप की आग में जलूँ
और जलकर 
यदि निखर सकूँ कुंदन सा
तो निखर जाऊँ 

और यदि नहीं 
तो अपने अंतस के राक्षस को 
मजबूती से पकड़कर 
उसी के साथ.....
अपने इंसान के हाथों 
फाँसी का फंदा बनाकर 
खड़ा-खड़ा  झूल जाऊँ