Friday, March 8, 2013

महिला दिवस पर…
                   
                     नारी  शक्ति को कोटि-कोटि प्रणाम

Tuesday, November 6, 2012

                  मुक्तक

इतना चाहो न मुझको   मैं   डर  जाऊँगा ।
दिल का शीशा जो टूटा बिखर जाऊँगा ।
गर  निगाहों से   मुझको   गिराया   कभी ,
जाऊँगा,  पर    न  जाने    कहाँ    जाऊँगा ।

Wednesday, July 11, 2012

          पावस के दोहे 
 
वर्षा ऋतु   मनभावनी, आइ    गयी    रसधार |
ताप दग्ध धरती पड़ी, अमृत    की    बौछार |
 
वन उपवन थे जल रहे, दुसह ताप की मार |
वर्षा ने   शीतल   किया, तन मन छुवे बयार |
 
दादुर   धुनि    मनभावनी, टर-टर करत पुकार |
झन झन झन जियरा हरै, झिल्ली की झनकार  |
 
गोरी    भीगे     द्वार    पर, उर   उमगा   अनुराग |
तन मन व्याकुल पीव बिन, जरै   विरह की  आग |

Monday, June 4, 2012

                      मुक्तक

आगे बढ़ने पर लगा प्रतिबन्ध है |
वापसी   का   रास्ता     भी   बंद  है |
परकटा पंछी    भला     जाए कहाँ ,
जिंदगी !   कैसा  तेरा   अनुबंध है ?

फूल   का  सौदा  करे, माली  चमन का |
पूछते हो हाल क्या? अपने  वतन   का |
अब   तो    मालिक के   भरोसे   जिंदगी ,
भेड़ियों  के  बीच है,  शावक   हिरन  का | 

Friday, May 4, 2012

आँसू  आँखों  में  आ  न  सके |
होठ  भी  कुछ  बता न सके |
बस खता है   निगाहों की यह ,
बात दिल की छुपा न सके | 

Wednesday, March 7, 2012

अंग     प्रत्यंग     हरा  हो ।
सरस ,    उमंग भरा  हो ।
इंद्रधनुष के  रंगों   जैसा ,
जीवन     रंग    भरा    हो ।

Friday, February 10, 2012

अलौकिक सुन्दरी

संगमरमर की   तराशी मूर्ति  हो तुम ,
या   अजन्ता की   कोई जीवित   कला ।
याकि हो अभिशप्त उतरी मृत्युभू पर ,
देवबाला    हो    कि .........कोई  अप्सरा ।

शांत यमुना सी    सुकोमल सुमन सी ,
श्याम घन सम केश सुन्दर कामिनी ।
या कि.......... भादौं की अँधेरी रात में ,
चीर घन   चमकी हो   चंचल दामिनी ।

स्वर्ण   सी    काया   महक चन्दन  उठे ,
या   सुमन   की  मधुर मोहक गंध हो ।
या  मनुज-स्वप्नों   की  अद्भुत सुन्दरी ,
या किसी कवि का सरस मधु छंद हो ।