आने को आया है मौसम मनभावन
आग राग गाती हैं मौसमी बहारें |
सूखे जले पत्तों को बुहारतीं बयारें |
गालों पर फागुन है आँखों में सावन ...
कोयल मृदुबैनी है तन-मन की काली |
कौए से करवाती शिशु की रखवाली |
छलनाओं के कर में सपनों का दरपन...
इच्छायें ऊँची ज्यों कचरे पर कचरा |
हाथों से गर्दन तक फूलों का गजरा |
कोठे पर मन बैठा मंदिर में नरतन.....
आशा तो फ्यूज बल्ब होल्डर में अटकी |
जीत हाथ आते ही मछली सी छटकी |
गले बँधी टाई सा हार का अपनपन ....