झंझट के झटके
Tuesday, September 21, 2010
------पत्थरों से डरता हूँ |
बात इंसानियत की करता हूँ |
रोज जीता हूँ रोज मरता हूँ |
लोग पागल न समझ बैठें कहीं,
शीशा हूँ पत्थरों से डरता हूँ |
1 comment:
समय चक्र
September 21, 2010 at 6:25 PM
बेहतरीन प्रस्तुति ...
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बेहतरीन प्रस्तुति ...
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